*8 लाख वर्ष पूर्व के महान योद्धा ने खुद सुनाई अपनी गाथा जानिए कौन है सात्यकि* द्वापर युग, हिंदू धर्म के चार युगों में से तीसरा युग है. हिंदू शास्त्रों के मुताबिक आज के समय से लगभग करीब 8 लाख वर्ष पहले द्वापर युग चल रहा था.इस युग में भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का नाश किया था. भगवान श्री कृष्ण ने इस युग में सैकड़ो युद्ध किये और इन सभी धर्म युद्धों में सात्यकि परछाई की तरह भगवान श्री कृष्ण के साथ रहे. हालांकि अब तक देखा गया है कि श्री कृष्ण गाथाओं में सात्यकि की चर्चा बहुत कम है परंतु उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है. हाल ही में एक अद्भुत घटना हुई और एक प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह का सात्यकि से साक्षात्कार हुआ और उन्होंने अपनी पूरी गाथा डायरेक्टर दुष्यंत को बताई सुनाई हालांकि आज के समय इस बात का गले से उतरना मुश्किल होगा परंतु डायरेक्टर दुष्यंत प्रताप सिंह के द्वारा लिखी गई पुस्तक 32 अध्यायों की लंबी गाथा है जो "सात्यकि द्वापर का अजेय योद्धा" के नाम से आ रही है ये किताब इतिहास के बहुत से छुप...
*सात्यकि* द्वापर युग के ऐसे अजेय योद्धा थे जिनके सामने शत्रु सेना घुटने टेक देती थी, उस कालखंड के बड़े बड़े महारथी वसुदेव कृष्ण और बलभद्र के इस शिष्य के सामने झुक जाते थे, कदाचित प्रभु श्री कृष्ण और शेषावतार बलराम के अलावा सात्यकि ही द्वापर के ऐसे योद्धा थे जो अविजित रहे, सतयुग, त्रेतायुग व द्वापर में ईश्वरीय अवतारों के अलावा ये परम सौभाग्य सात्यकि को ही प्राप्त है, हमारी युग गाथाओं में सात्यकि का वर्णन उतना नहीं मिलता जिसके वे अधिकारी है अनुसंधान व आत्मसाक्षात्कार के वक्त इस महान महारथी की वीरता आपके रोंगटे खड़े कर देती है, शाल्व, शल्य, विरुपाक्ष, गंगापुत्र भीष्म, सूर्यपुत्र कर्ण, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, दुर्योधन, अलम्बुश जैसे योद्धाओं को परास्त करने वाले इस वीर की निष्ठा सिर्फ अपने प्रभु केशव और दाऊ के लिए थी। प्रभु श्री कृष्ण उनकी सारी दुनिया थे और उतना ही प्रेम और भरोसा कृष्ण को सात्यकि पर था। हां एक और शख्स था जो सात्यकि के दिल में रहता था वो था सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु। इस सत्य को कोई नहीं झुठला सकता कि अगर महाभारत में सात्यकि और अभिमन्यु ना लडे होते तो शायद...
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